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जानिए क्यों खास है 2017 की महाशिवरात्रि । कैसे पाए महादेव भगवान शिव का आशीर्वाद ।

24 फरवरी दिन शुक्रवार को महाशिवारात्रि पर भगवान शिव को मनाने का सुनहरा मौका है। इस वर्ष बेहद खास दो योग बन रहे हैं, जानिए कब कब करें शिव पूजन।

भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व इस बार स्वार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास होगा। चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे प्रारंभ होगी। जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि व्यापिनी होने पर विशेष माना जाता है। ऐसे में चूंकि 25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिव रात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत रहेगा।

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24 फरवरी को चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होने के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी, लेकिन भद्रा पाताल लोक में होने के कारण महाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी, बल्कि यह अत्यंत शुभ रहेगा। महाशिवरात्रि का व्रत कर रात्रि में ओम नम: शिवाय का जाप करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होगी। जो व्यक्ति वर्ष भर कोई व्रत उपवास नहीं रखता है और वह मात्र महाशिवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे पूरे वर्ष के व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है।

बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इससे पूर्व 30 वर्ष पहले महाशिवरात्रि दो दिन मनाई गई थी। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। प्रथम पूजा शाम को छह बजकर 15 मिनट से रात नौ बजकर 25 मिनट तक। दूसरी पूजा रात को नौ बजकर 25 मिनट से रात 12 बजकर 35 मिनट तक। तीसरी पूजा रात 12 बजकर 35 मिनट से रात तीन बजकर 45 मिनट तक। चौथी पूजा रात तीन बजकर 45 मिनट से सुबह छह बजकर 54 मिनट तक।

मिश्र ने बताया कि ये चारों पूजन का विशेष महत्व है, लेकिन दूसरे पूजन में रात नौ बजकर 25 मिनट से रात 12 बजकर 35 मिनट का समय बहुत ही शुभ है। चंडीगढ़ में सेक्टर-38 के श्री सनातन धर्म मंदिर के प्रमुख पुजारी उमाशंकर पांडेय का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन शांति पाठ करने के बाद संकल्प, गणेश, नंदी, वीरभद्र, कार्तिक, कुबेर, कीर्तिमुख, सर्प का पूजन करना चाहिए। इस पूजन को करने के बाद शिव पार्वती का पूजन प्रारंभ करनी चाहिए।

 

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