General

दिमाग तेज करने के लिए चाहिए केवल 40 सेकेंड, यकीन नहीं होता तो जानिए

कभी-कभी यह ख्याल आता है कि दिमाग भी कितने काम की चीज़ है, इतना छोटा-सा होकर भी हमारे पूरे शरीर पर नियंत्रण रखता है दिमाग। दिमाग की शक्तियों का अंदाजा भी हम नहीं लगा सकते, यह हरदम हमारे लिए काम करता है। जब हमें दिमाग की जरूरत हो यह हाजिर रहता है, हर बेशक थक जाएं लेकिन दिमाग चलता रहता है।

 

 

साइंस के तथ्य

क्या आप जानते हैं कि साइंस के मुताबिक इस सृष्टि में हर मनुष्य को एक जैसा दिमाग मिलता है, बस उसे कैसे इस्तेमाल किया जाए और सक्षम बनाया जाए यह भिन्न-भिन्न लोगों पर निर्भर करता है। शायद आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन यह सत्य है कि दिमाग के पास बातों को याद रखने की कोई सीमा नहीं होती।

 

साइंस का मानना है कि सुनने की तुलना में जो चीज़ें देखी गई हों वह और भी अच्छे से याद रहती हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आंखों देखी बातें भी हम कुछ ही पलों में भूल जाते हैं। पूरी तरह से नहीं तो कम से कम उन्हें उसी रूप में याद रख सकना हमारे लिए असंभव-सा हो जाता है।

 

एक शोध

बीबीसी ऑनलाइन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ता क्रिस बर्ड्स ने दिमागी ताकतों पर शोध किया है। उनकी रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि आखिरकार वह क्या कारण है जिससे हम बातों को लंबे समय तक याद नहीं रख पाते। बर्ड्स का कहना है कि कई बार हम आंखों से कोई दृश्य देखते हैं, लेकिन जब दोबारा से हमसे कोई उस दृश्य की व्याख्या मांगता है तो हम उसे टूटे-फूटे अंदाज़ में बताते हैं। असल में किस घटना के बाद कौन सा पल आया हम ठीक से याद नहीं कर पाते हैं, ऐसा क्यों!

 

 

इसका उत्तर और साथ ही इसका समाधान निकालने के लिए भी बर्ड्स ने कुछ लोगों पर शोध किया। इस शोध के अंतर्गत उसने कुछ लोगों को ब्रेन स्कैनर के भीतर रहते हुए यूट्यूब पर कुछ वीडियो देखने को कहा। वीडियो देखने के तुरंत बाद ही कम से कम 40 सेकेंड के लिए दोबारा से उस वीडियो के दृश्यों को दिमाग में याद करने को कहा।

 

इससे बर्ड्स को यह हासिल हुआ कि वीडियो देखने के तुरंत बाद ही जब लोगों ने खुद के दिमाग को ही उस वीडियो के दृश्यों को समझाया तो वे उसे और भी अच्छे से याद रखने में सफल हुए। जब उनसे थोड़ी देर बाद वीडियो के बार में पूछा गया तो बिना किसी गलती के उन्होंने वीडियो को बिल्कुल सही तरीके से समझाया।

 
क्या है कारण

इसका कारण बर्ड्स ने बताया कि जब वे वीडियो को देख रहे थे तो शायद उसे एंज्वाय कर रहे थे, लेकिन जब वीडियो देखने के तुरंत बाद उन्हें उसे याद करने को कहा गया था तब उन्होंने अपनी असली प्रक्रिया शुरू की। इस प्रक्रिया में उन्होंने वीडियो के एक-एक दृश्य को दिमाग में जोड़ा, उससे एक कहानी बनाई और यह कहानी अंतत: पूरी वीडियो के रूप में उनके सामने आई।

 

ऐसा करते हुए वे वीडियो को कई बार अपनी खुद की लाइफ से या अपने पसंदीदा लोगों से जोड़ते हैं। जैसे कि वीडियो के किसी विशेष दृश्य में देखा हुआ इंसान यदि उन्हें किसी प्रसिद्ध कलाकार जैसा लगा, तो वे उस दृश्य को कभी भूलेंगे नहीं।

 

 एक उदाहरण
बर्ड्स के मुताबिक बातों को याद रख सकने का यह तरीका काफी काम का है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी दुर्घटना के इकलौते गवाह बन गए हैं, आपने वह घटना घटते हुए अपनी आंखों से देखा लेकिन धीरे-धीरे जब तक बयान देने का समय आया, आपके दिमाग में घटना संबंधी दृश्य धुंधले पड़ने लगे।

 

 

आप भी आज़माएं
यदि उस समय कोई बातों को याद करने के इस तरीके को अपनाए तो वह शायद कभी भी उस घटना को भुला नहीं सकेगा। बर्ड्स के मुताबिक घटना के तुरंत बाद केवल आधा मिनट का समय भी उस दृश्य को लंबे समय तक याद रख सकने के लिए काफी है।

Tags

Related Articles