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हजारों साल पुराने मंदिर को पाकिस्तान ने बनाया शौचालय, पढ़े पूरी खबर

पाकिस्तान द्वारा लगातार मीडिया में कोई न कोई खबरें ऐसी आती रहती हैं जिससे भारत को चोट पहुंचती है और दोनों देशों के बीच चाह कर भी शांति स्थापित नहीं हो पाती। आए दिन सीजफायर का उल्लंघन तो है ही पर पाकिस्तान का अपने ही देश में रह रहे अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार नंदनीय है।

 
1000 वर्ष पुरानावरुण देव मंदिर
अल्पसंख्यकों के प्रति सरकार की उदासीनता एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि सरकार ने एक बहुत ही प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर की भयावह स्थिति को कैसे नजरअंदाज किया। वरुण देव मंदिर सिंध के पाकिस्तान के कराची जिले के मनोरा में स्थित है। देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कराची ‘धर्मनिरपेक्ष’ है और पाकिस्तान में और जगह के मुकाबले सिंध में हिंदुओं की संख्या कहीं ज्यादा है। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और भगवान वरुण को समर्पित है। शायद यह केवल एकमात्र मंदिर है और निश्चित रूप से पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पुराना और सबसे बड़ा हिंदू देवता को समर्पित है।

 

 

 

शौचालय के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है मंदिर
मंदिर पाकिस्तान के लिए एक विरासत का प्रतीक होना चाहिए। परंतु डेली टाइम्स ने 2008 में यह रिपोर्ट दी थी कि मंदिर का एक हिस्सा शौचालय के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। जब पूजा के लिए मंदिर इस्तेमाल होता था तब 1950 के दशक में हिंदू समुदाय ने ‘लाल साईं वरुण देव’ का त्यौहार आखिरी बार मनाया गया था। अब मंदिर के कमरे और परिसर शौचालय के रूप में उपयोग किए जाते हैं। यह हिंदू समुदाय का बड़ा अपमान है। मंदिर का ख्याल रखने वाले जीवरीज ने बताया कि कोई भी अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान नहीं करता है।

 

 

 
मनोरा छावनी बोर्ड ने नहीं दिया कोई जवाब
मंदिर मनोरा द्वीप पर स्थित है जो इसे पाकिस्तानी नौसेना के अधिकार क्षेत्र में लाता है। मीडिया द्वारा मंदिर के स्वामित्व के बारे में पूछताछ करने के लिए सैन्य संपत्ति अधिकारी (एमईओ) से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और जब जीवराज ने मनोरा छावनी बोर्ड (एमसीबी) को लिखा तो उन्हें बताया गया कि यहां कोई रिकॉर्ड नहीं है।

 
USA ने उठाया कदम


अब मंदिर की बहाली की खबर प्रकाशित की जा रही हैं और पूरे पाकिस्तान में फैल गई। भारत में कई ‘धर्मनिरपेक्षतावादी’ लोगों के लिए यह पाकिस्तान की तरफ से उठाया गया एक बड़ा कदम था। परंतु यह कदम पाकिस्तान द्वारा नहीं बल्कि अमेरिका द्वारा उठाया गया है।

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