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धन के सभी रास्ते खोलना चाहते हो, तो इस विधि से करे सूर्यदेव को जल अर्पित

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सभी ग्रहों का अधिपति माना गया है। सभी ग्रहों को प्रसन्न करने के बजाय यदि केवल सूर्य की ही आराधना की जाए और नियमित रूप से सूर्य देव को जल चढ़ाया जाए तो आपका भाग्योदय होने से कोई नहीं रोक सकता है। अगर आप नियमित रूप से सूर्यदेव को जल अर्पित नहीं कर पाते हैं तो रविवार के दिन सूर्यदेव को जल चढ़ा सकते हैं।

 

 

रविवार का दिन सूर्य देव को बहुत प्रिय है और रविवार को सूर्यवार भी माना जाता है। ऐसे में अगर आप नियमित रूप से रविवार के दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करते हैं तो इसका उतना ही फल मिलता है जितना की प्रत्येक दिन जल चढ़ाने से मिलता है। वहीं जब सूर्य पूर्व दिशा में हो तभी जल चढ़ाना चाहिए क्योंकि पूर्व दिशा को सूर्यदेव के उदय का मार्ग कहा जाता है जो स्वयं शक्ति और जीवन के प्रतीक माने जाते हैं।

 

 

सूर्य को जल चढ़ाने से होते हैं ये लाभ :-
जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर चल रहा हो या अन्य किसी ग्रह की प्रतिकूलता चल रही हो अथवा कोई सरकारी कामकाज अटका हुआ हो, कार्यस्थल पर अधिकारियों से अनबन चल रही हो अथवा व्यापार सही नहीं चल रहा हो। उन सभी को प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाने से तुरंत लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त जिन्हें जेल जाने या नौकरी छूटने का डर हो, उन्हें भी सूर्याराधना तुरंत लाभ देती है।

 

 

 

सूर्य को जल चढ़ाने के लिए सदैव तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करना चाहिए। तांबा भी सूर्य की ही धातु है। जल में चावल, रोली, फूल पत्तियां आदि डाल लेने चाहिए। इसके बाद जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री मंत्र के अतिरिक्त आप भगवान सूर्य के 12 नामों का भी जाप कर सकते हैं ये 12 नाम निम्न प्रकार हैं-

 

 

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर, दिवाकर नमस्तुभ्यं, प्रभाकर नमोस्तुते।
सप्ताश्वरथमारूढ़ं प्रचंडं कश्यपात्मजम्, श्वेतपद्यधरं देव तं सूर्यप्रणाम्यहम्।।

 

 

सूर्य को अर्ध्य देते समय पानी की जो धारा जमीन पर गिर रही है, उस धारा से सूर्य को देखना चाहिए, इससे आंखों की रोशनी तेज होती है। अर्ध्य देने के बाद जमीन पर गिरे पानी से चरणामृत का पान करें तथा अपने मस्तक पर लगाएं। साथ ही आप सूर्यदेव को अपनी मनोकामना बताएं तथा उनसे इच्छापूर्ति का वरदान देने की प्रार्थना करें, कुछ ही समय में आपकी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी।

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