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आज संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की उपासना से पूरी होगी हर मनोकामना, जाने विधि

सनातन धर्म में शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य बताई गयी है। देवता भी अपने कार्यों की शुरुआत में गणेश जी की पूजा अर्चना सबसे पहले करते हैं। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायकी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है।

 

श्रावण मास की संकष्टी चतुर्थी १२ जुलाई २०१७ (बुधवार) को है। संभव हो तो उपवास  करें। इस व्रत को करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है। चन्द्रोदय तक निराहार रहने का संकल्प लेना चाहिए। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को व्रत कर चन्द्र दर्शन करके गणेश पूजन कर ब्राह्मण भोजन करवाने से विद्या धन, संतान, रोग, आदि संकटों से मुक्ति मिलती है। सभी अभिलाषाएं पूरी की जा सकती हैं। ऐसा गणेशजी कहते हैं।  

 

 

श्री गणेशजी को ऐसे करें प्रसन्न
सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें, लाल, केशरिया, पीले या साफ वस्त्र धारण करें। किसी योग्य आचार्य या पंडित के निर्देशन में दोपहर के समय सामर्थ्‍य के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

 

 

 

 

पूजा का संकल्प लेने के बाद षोडशोपचार विधि से पूजन कर गजानन की आरती करें। पूजन के समय अथर्वशीर्ष, श्री गणेश स्तोत्र, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें।

 

 

श्री गणेश को तिल से बनी वस्तुओं, तिल-गुड़ के लड्‍डू तथा मोदक का भोग लगाएं। नैवेद्य के रूप में मोदक व ऋतु फल आदि अर्पित है। चन्द्र दर्शन करके गणेश पूजन कर यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करें। व्रत का श्रद्धा से पालन करने पर श्री गणेश की कृपा से विघ्न दूर और  मनोरथ पूरे होते हैं।

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