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अपना भविष्य चमकाने के लिए आज शाम इस विधि-मुहूर्त में करें भगवान गणपति की पूजा

देश के कई राज्यों में बुधवार ही भगवान गणेश का दिन माना जाता है। इसीलिए भगवान गणेश का दूसरा नाम मंगलमूर्ति भी है। पुराणों और शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। बुधवार को गणपति की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसलिए बुधवार शाम को उपासना के वक्त गणपति के इन 12 संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्र का पाठ करते ही इंसान के सारे बिगड़े काम तुरंत बन जाते हैं।

 

पूजा की विधि:
सबसे पहले सिंदूरी गणेशजी की पूजा करते समय चमेली के तेल का दीपक जलाएं। गूगल धूप, लाल फूल विशेषकर गुड़हल का, सिंदूर चढ़ाएं और गुड का भोग लगाए। और लाल चंदन की माला मंत्र के साथ संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं के 8 पाठ करें। भगवान गणपति की पूजा संपन्न होने के बाद उस गुड़ को गाय को खिला दें।

 

विशेष मंत्र: ॐ वं विघ्न-नायकाय नमः॥
पूजन मुहूर्त: शाम 17:30 से शाम 18:30 तक।
संकष्टनाशनं गणेश स्तोत्रं कुछ इस प्रकार है—

प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम। भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम। तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥

 

 

लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च। सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥3॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर:। न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥5॥

 

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्। संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥7॥

 

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत। तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8॥

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