Spiritual

अपने समस्त दुखो से निजाद पाने के लिए कीजिये गणेश संकटनाशन स्तोत्र का जाप

विघ्नहर्ता भगवान गणेश आपके जीवन से सभी बाधाओं, चिंताओं और दुःखों से छुटकारा पाने के लिए आशीर्वाद देते है। गणेश संकटनाशन स्तोत्र एक विशेष प्रार्थना है जो कि भगवान गणेश को समर्पित है। इसका नियमित जाप करने से ये शक्तिशाली मंत्र सभी बाधाओं और दुखों को दूर करने में मदद करते है। नारद पुराण में इस स्तोत्र का वर्णन किया गया है। अगर इन शक्तिशाली स्तोत्र का नियमित रूप से जाप किया जाता है तो यह आपके जीवन से सभी समस्याओं को दूर कर सकता है और आपको उद्धार, धन और ज्ञान की प्राप्ति होती है इसलिए यह स्तोत्र भक्तों में बहुत लोकप्रिय है। यहाँ इस स्तोत्र के कुछ छंद और उसका अर्थ बताये गए है –

 

1. ॥प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम। भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये॥
स्तोत्र का अर्थ – जो व्यक्ति जीवन में धन, सुख, दीर्घायु, प्रेम इत्यादि प्राप्त करना चाहता है, उसे देवी पार्वती के पुत्र भगवान गणेश से प्रार्थना करनी चाहिए। भगवान गणेश को माँ पार्वती ने बनाया था और बाद में भगवान शिव ने उन्हें दूसरा जीवन दिया था। उसके बाद उन्हें प्रथम पूज्य भी बनाया गया। वह ज्ञान और उपकार के अवतार है। वह अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते है।
2. ॥प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदंत द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिड्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥
स्तोत्र का अर्थ – सबसे पहले वक्रतुण्ड (टेढे मुखवाले), दूसरा एकदन्त (एक दाँतवाले), तीसरा कृष्ण पिंगाक्ष (काली और भूरी आँख वाले), चौथा गजवक्र (हाथी के मुख वाले) भगवान गणेश का ध्यान करें।

 

 

3. ॥लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च। सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूर्मवर्णं तथाष्टकम्॥
स्तोत्र का अर्थ – पाँचवा लम्बोदरं (बड़े पेट वाला), छठा विकट (विकराल), साँतवा विघ्नराजेन्द्र (विध्नों का शासन करने वाला राजाधिराज) तथा आठवाँ धूम्रवर्ण (धूसर वर्ण वाले) भगवान गणेश का ध्यान करें। जिस तरह एक हाथी जंगल में रास्ते को साफ करता है और दूसरे जानवरों को चलने के लिए रास्ता बनाता है उसी प्रकार भगवान गणेश भी अपने भक्तो के लिए मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर कर के उनके रास्ते को आसान बनाते है।
4. ॥नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥
स्तोत्र का अर्थ – नवाँ भालचन्द्र (जिसके ललाट पर चन्द्र सुशोभित है), दसवाँ विनायक, ग्यारवाँ गणपति (गणो की सेना का प्रमुख) और बारहवाँ गजानन के रूप में भगवान गणेश का ध्यान करें। वह अपने भक्तो के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों को सुलझाने के लिए तैयार हमेशा तैयार रहते है।

 

 

 

5. ॥द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:। न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम्॥
स्तोत्र का अर्थ – जो भक्त सुबह, दोपहर और शाम को साफ़ मन के साथ भगवान गणेश के सभी 12 नामों को याद करते हैं, उन्हें कभी भी किसी से डर नहीं लगेगा। वे अपने जीवन में सभी लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे।
6. ॥विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्॥
स्तोत्र का अर्थ – भगवान गणेश लोगो की सभी इच्छाओं की पूर्ति करते है। वे विद्यार्थियों को विद्या का आशीर्वाद देते है, धन प्राप्ति की इच्छा रखने वालो को समृद्धि का आर्शीवाद देते है और मोक्ष की इच्छा रखने वालो को शांति प्रदान करते है।
7. ॥जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्। संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय:॥
स्तोत्र का अर्थ – इस विशेष स्तोत्र का जाप करने वाले व्यक्ति की सभी इच्छाएं बहुत जल्दी पूरी होती है। हालाँकि इसके लिए उसे इस स्तोत्र का नियमित रूप से जाप करना होगा।

 

8. ॥अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत। तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:॥
स्तोत्र का अर्थ – ये स्तोत्र भगवान गणेश को समर्पित विशेष प्रार्थना है। इसलिए, इस स्तोत्र का जाप करने वाले व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। इस स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति को जीवन के हर कदम पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते है।

Related Articles