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महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा करते समय भुलकर भी न करें ये 8 काम, अशुभ होगा

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा करने जाएं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। अगर भूले से भी कर दी ये गलतियां तो अशुभ हो जाएगा। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग में शिव चारों पहर रहते हैं। जैसे आप हर पहर में अलग-अलग खाना पसंद करते हैं, वैसे ही चारों पहर में शिव पूजा के भी अलग अलग नियम हैं।  अलग-अलग प्रहर में भोलेनाथ की पूजा के लिए अलग-अलग चीजों का प्रयोग करना चाहिए। अगर आप सूर्योदय से तीन घंटे के अंदर भगवान शिव की पूजा करने जा रहे हैं तो तिल, जौ, कमल एवं बेल पत्र से भगवान शिव की पूजा करें।

 

 

सूर्योदय के तीन घंटे के बाद अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो बिजौरे का फल, नींबू एवं खीर के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा करें। भगवान भोले नाथ को भांग और धतूरा भी चढ़ा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें सूर्योदय के छह घंटे के अंदर इन चीजों से शिव जी की पूजा करें। सूर्योदय के छह घंटे के बाद से नौ घंटे के अंदर आप पूजा करने जा रहे हैं तो तिल, मालपुआ, अनार एवं कपूर से शिव जी की पूजा करें।

 

 

सूर्योदय के नौ घंटे के बाद अगर आप पूजा करने जा रहे हैं तो उड़द, जौ, मूंग, बेलपत्र, शंखपुष्पी से भोलनाथ की पूजा करें। अगर आपके लिए प्रहर के अनुसार सामग्री जुटाना कठिन हो तो कोई बात नहीं। भगवान शिव को गंगाजल से स्नान करवाकर में बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें और 108 बार शिव पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का जप करें। इससे ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाएंगे। बस आपकी भक्ति सच्ची होनी चाहिए।

 

 

 

काले रंग के कपड़े ना पहनें
महाशिवरात्रि का त्योहार शिवभक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है। लेकिन भूलवश शिव जी को प्रसन्न के लिए ऐसी कुछ गलतियां कर देते हैं जिससे उनकी पूजा पूरी नहीं हो पाती है। पहली बात, शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को यदि प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दिन काले रंग के कपड़े ना पहनें। कहा जाता है की भगवान शिव को काला रंग पसन्द नहीं है, जिसके कारण इस दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

 

 

ये सभी चीजें भूलकर भी न चढ़ाएं
भगवान शिव को सफेद फूल बहुत पसंद होता है, लेकिन केतकी का फूल सफेद होने के बावजूद भोलेनाथ की पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव की पूजा करते समय शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना गया है। शिव की पूजा में तिल नहीं चढ़ाया जाता है। तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है, इसलिए भगवान विष्णु को तिल अर्पित किया जाता है लेकिन शिव जी को नहीं चढ़ता है।

 

 

भगवान भोलेनाथ को ये भी पसंद नहीं
भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। शिव प्रतिमा पर नारियल चढ़ा सकते हैं, लेकिन नारियल का पानी नहीं। हल्दी और कुमकुम उत्पत्ति के प्रतीक हैं, इसलिए पूजन में इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिएं, खंडित पत्र कभी न चढ़ाएं। चावल सफेद रंग के साबुत होने चाहिएं, टूटे हुए चावलों का पूजा में निषेध है। फूल बासी एवं मुरझाए हुए न हों।

 

 

शिवरात्रि के दिन इन लोगों का अपमान न करें
ध्यान रखें कि किसी बुजुर्ग व्यक्ति, गुरु, भाई-बहन, जीवन साथी, माता-पिता, मित्र और ज्ञानी लोगों का अपमान गलती से भी न करें। वैसे तो किसी का भी अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए, लेकिन शिवरात्रि पर इस बात का पालन अवश्य होना चाहिए। अन्यथा शिवजी ऐसे लोगों से प्रसन्न नहीं होते हैं जो यहां बताए गए लोगों का अपमान करते हैं। इसके अलावा हो सकते तो बुरे विचार मन न आने दें। मांसाहार यानी नॉनवेज से बचें।

 

 

सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए
शिवरात्रि के दिन पूजा के लिए सुबह-सुबह का समय सबसे अच्छा रहता है। अगर शिव कृपा चाहिए तो सुबह बिस्तर जल्दी छोड़ देना चाहिए। जल्दी उठें और स्नान आदि कार्य करने के बाद शिवजी की पूजा करें। अगर देर तक सोते रहेंगे तो इससे आलस्य बढ़ेगा। सुबह जल्दी उठने से वातावरण से स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। सुबह के समय मन शांत रहता है और इस वजह से पूजा पूरी एकाग्रता से हो पाती है। एकाग्रता से की गई पूजा बहुत जल्दी शुभ फल प्रदान करती है।

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